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Saturday, 13 December 2014

जब ठंड में परेशान करे जुकाम-खांसी : अपनाएं ये उपचार | Cough : Ayurveda Health tips in winter

Cough : Ayurveda Health tips in winter
जब ठंड में परेशान करे जुकाम-खांसी : अपनाएं ये  उपचार


 सर्दी में होने वाली सबसे आम समस्या है खांसी-जुकाम, जिसे लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं। यह छोटी सी दिखने वाली परेशानी भी नज़रंदाज़ करने पर घातक हो सकती है इसलिए इसे अनदेखा तो बिलकुल भी न करें।

जुकाम क्या है

जुकाम एक तरह की एलर्जी है, जिसमें नाक से पानी निकलने लगता है। ये कोई बीमारी नहीं, बल्कि श्वसन तंत्र में एलर्जी या इन्फेक्शन होने का एक लक्षण है जो यदि लम्बे समय तक बना रहे तो निमोनिया और श्वसन तन्त्र से जुड़ी दूसरी बीमारियों को दर्शाता है।

हाई रिस्क ग्रुप 


बच्चे, बूढ़े, शुगर, हाई बीपी, टीबी, दमा, हेपटाइटिस व एनीमिया के मरीज, कुपोषण के रोगी जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है व जिनमें एलर्जी की टेंडेंसी हो उन्हें जुकाम जल्दी होता है।

जुकाम के लक्षणों को ऐसे पहचानें

1. यदि नाक से निकलने वाला पानी पतला और सफेद हो तो समझें कि सामान्य जुकाम है। फिक्र की जरूरत नहीं है।

2. अगर पानी गाढ़ा हो तो समझें कि इन्फेक्शन ज्यादा हो गया है। तुरंत ही अपने डॉक्टर को दिखाएं।

3. नाक बंद हो तो वायरल व बैक्टीरियल दोनों तरह के इन्फेक्शन हो सकते हैं। वायरल इन्फेक्शन है तो स्टीम और एंटी-एलर्जिक दवा से ठीक हो जाएगा, नहीं तो आयुष इलाज या एंटीबायोटिक्स लेनी होंगी।

4. अगर स्राव हरा रेशेदार हो, तो इन्फेक्शन है। समझें कि बात बढ़ रही है और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

5. अगर कफ के साथ खून भी आए तो खतरनाक है। टीबी का लक्षण हो सकता है। फौरन डॉक्टर को दिखाएं।
जुकाम के कुछ सामान्य उपचार-

समस्या


हल्का सर्दी जुकाम हो तो क्या करें ?

उपचार-


1. दो कप पानी में एक चौथाई छोटी चम्मच सोंठ, दस तुलसी की पत्तिया, पांच छोटी पीपल और थोडा सा गुड़ मिलाकर खौला लें। जब यह अच्छी तरह खौल जाये तो चाय की तरह घूंट-घूंटकर पीने से सर्दी-जुकाम में लाभ मिलता है।

2. अपने भोजन में अदरक का प्रयोग अधिक करें। चाय, सब्जी, दाल, सलाद आदि में अदरक को लेते रहने से जुकाम की परेशानी से बचा जा सकता है।

3. विटामिन-सी के प्रयोग से जुकाम को काबू में रखा जा सकता है। अत: अपने भोजन में नींबू का प्रयोग ज़रूर करें।

समस्या-


इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कोई आसान उपाय बताएं ?

उपचार-


1. सुबह उठकर बिना कुछ खाए पांच लहसुन की कलियों को खाने से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

2. अजवाइन के बीजों को कुचलकर एक पतले साफ सूती कपडे में बांधकर सोने से पहले सूंघते रहने से काफी लाभ पहुंचता है।

3. एक कप दूध में दो कप पानी मिलाकर इसमें दस कालीमिर्च, और दस तुलसी के पत्तियों को मिलाकर खौला लें। हल्का गुनगुना पीने से जुकाम ख़ास तौर से वायरल इन्फेक्शन वाले जुखाम में लाभ होता है।

4. एक चम्मच शहद में थोड़ी सी पीसी हुई काली मिर्च का पाऊडर डाल कर मिलाएं और उसे चाटें।

5. तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय खांसी में सबसे बढि़या रहती हैं।

समस्या-


बार बार नाक बंद हो जाती है ;क्या करा जाय ?

उपचार-


रात में सोते समय दोनों नाक में दो-दो बूंद सरसों का तेल पांच दिनों तक लगातार डालें तो खांसी-सर्दी और सांस की बीमारियां दूर हो जाएंगी। सर्दियों में नाक बंद हो जाने के दुख से मुक्ति मिलेगी और शरीर में हल्कापन मालूम होगा।

समस्या-


बार बार होने वाली खांसी में क्या करूं ?

उपचार-


मुलहठी और मिश्री को नींबू के रस में मिलाकर लेने से खांसी कम करने में मदद मिलती है।

पिप्पली , काली मिर्च, सौंठ और मुलहठी का चूर्ण बनाकर चौथाई चम्मच शहद के साथ लेना अच्छा रहता है।

समस्या-


पुराने जुखाम के कारण सिरदर्द रहता है क्या करें ?

उपचार-


एक बड़ी चम्मच काली मिर्च का चूर्ण एक चुटकी हल्दी के साथ एक प्याले दूध में उबालें। दो तीन दिन तक लगातार इसका सेवन करते रहें। माइग्रेन के दर्द में आराम मिलेगा।

समस्या-


मेरा गला अक्सर ही बैठ जाता है कोई आसान इलाज बताएं?

उपचार-


गला बैठ जाने वाले रोगियों को हम मुलेठी के चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर खाने की सलाह देते हैं। इससे बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। इसके अलावा सोते समय एक ग्राम मुलेठी के 2 gm चूर्ण को मुंह में रखकर चबाते रहें ; फिर वैसे ही मुंह में रखकर सो जाएं। सुबह तक गला साफ हो जायेगा। गले के दर्द और सूजन में भी आराम आ जाता है।

समस्या-

मुझे टांसिल्स हो जाते है क्या आयुर्वेद में आसान इलाज है ?

उपचार-

एक प्याला (200 ml) दूध में 2 ग्राम पिसी हल्दी मिलाकर उबालें; और छानकर चीनी मिलाकर पीने को दें। आमतौर पर अधिकांश रोगियों में सोते समय इसे पीने पर तीन चार दिन में ही आराम मिल जाता है।

समस्या-

पुरानी खांसी रहती है कोई इलाज बताइये ?

उपचार-

एक चम्मच अनार की सूखी छाल बारीक पीसकर, छानकर उसमें थोड़ा सा कपूर मिलायें। यह पाउडर दिन में दो बार पानी के साथ मिलाकर पीने से पुरानी खांसी में आराम होता है।

समस्या-

सूखी खांसी से परेशान हूं क्या करूं ?

उपचार-

1. 1 ग्राम हल्दी के पाउडर को एक चम्मच शहद में मिलाकर लेने से भी सूखी खांसी में आराम हो जाता है।

2. सूखी खांसी के लिए आने वाले रोगियों को हम छोटे से अदरक के टुकड़े को छीलकर और उस पर थोड़ा सा नमक छिड़क कर चूसने की सलाह देते हैं।

3. नींबू के रस में 2 चम्मच ग्लिसरीन और 2 चम्मच शहद मिलाकर मिश्रण बना लें और रोजाना इस मिश्रण का 1 चम्मच सेवन करने से सूखी खांसी से काफी राहत मिलेगी।

समस्या-

बैक्टीरियल इन्फेक्शन वाली खांसी डायग्नोज़ हुई है; कोई आसान इलाज बताएं -

उपचार-

जो खांसी टी.बी., अस्थमा और ब्रौन्काइटिस के कारण उत्पन्न होती है उसमें हम लौंग का तेल, अदरक और लहसुन का मिश्रण हर रात को सोने से पहले लेने की सलाह देते हैं।

समस्या-

मेरे सीने में बलगम जमा हो गया है कोई आसान इलाज बताएं-

उपचार-

1. सीने में बलगम के जमाव को निकालने के लिए अंजीर बहुत ही उपयोगी होते हैं।

2. अदरक को पानी में 10-15 मिनट के लिए उबाल लें और उसमें एक दो चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर दिन में तीन चार बार पीयें। ऐसा करने से आपका बलगम बाहर निकलता रहेगा और आपको खांसी में लाभ पहुंचेगा।
खान पान और आहार-

1. ऐसे रोगियों में हम रोजाना के खान पान में ठंडे भोजन के सेवन से बचने की सलाह देते हैं क्योंकि इससे आपके गले की उत्तेजना और अधिक उग्र हो सकती है।

2. किसी भी तरल पदार्थ को पीने से पहले उसे गर्म ज़रूर करें।

3. खान पान में पुराने चावल का प्रयोग करना भी लाभदायक होता है ऐसा हमारा अनुभव है।

4. ऐसे खान-पान का सेवन बिलकुल ना करें जिससे शरीर को ठंडक पहुंचे। खीरे, हरे केले, तरबूज, पपीता और संतरों के सेवन को थोड़े दिनों के लिए त्याग दें।
ऐसा करें-

1. सुबह ब्रश करते समय अंगूठे से अपने तालू को हल्का सा दबाएं। यह क्रिया बैठकर करें। तालू को हाथ के अंगूठे से साफ करें।

2. जिन लोगों को एलर्जी से जुकाम हो जाता हो तो पुरानी चीजें जैसे पुरानी किताबें, अलमारियां, काफी समय से न पहने गए कपड़े और कालीन साफ करके रखें। इनमें बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं जो कि आपको खांसी भी कर सकते हैं।

3. पानी घूंट-घूंट करके पीएं। इससे कफ नहीं बढ़ता।

4. जुकाम व फ्लू का इंफेक्शन होने पर घर में कपूर और गुग्गुलु जलाएं। इसके धुएं से घर का वातावरण शुद्ध होता है और वायरस दूर हो जाता है।
यह ना करें-

1. सुबह के समय बिस्तर से उठकर नंगे पैर ना चलें।

2. जाड़ों में ठंडी चीजें जैसे दही, चावल, ठंडा पानी, आइसक्रीम, केला, चॉकलेट और ठंडा दूध अधिक नहीं लें। फ्रिज में रखी चीजें व ज्यादा मीठा न लें।
योग चिकित्सा-

किसी अच्छे योग चिकित्सक या प्रशिक्षक से निम्न क्रियाएं सीख लें-

जलनेति, कपालभाति, सूर्य नमस्कार, उत्तानपादासन, धनुरासन व भस्त्रिका प्राणायाम, लेटकर साइकल चलाने की क्रिया रोज़ करें।

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सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥


डॉ.स्वास्तिक
चिकित्सा अधिकारी
(आयुष विभाग, उत्तराखंड शासन) 


NOTE: ये सूचना सिर्फ आपके ज्ञानवर्धन हेतु है. किसी भी गंभीर रोग से पीड़ित होने पर चिकित्सक के परामर्श के बाद अथवा लेखक के परामर्श के बाद ही कोई दवा लें. लेखक से drswastikjain@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है.

Friday, 7 November 2014

केले के स्वास्थ्यवर्धक गुण

केले के स्वास्थ्यवर्धक गुण HEALTH BENEFITS OF BANANA IN HINDI




केला  (Banana) स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत लाभदायक है। रोज एक केला खाना तन-मन को तंदुरुस्त रखता है। केला शुगर और फाइबर का बेहतरीन स्रोत होता है।



केले में थाइमिन, नियासिन और फॉलिक एसिड के रूप में विटामिन ए और बी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। केले को ऊर्जा का अच्छा स्रोत माना जाता है। साथ ही इसमें पानी की मात्रा 64.3 प्रतिशत, प्रोटीन 1.3 प्रतिशत, कार्बोहाईड्रेट 24.7 प्रतिशत तथा चिकनाई 8.3 प्रतिशत होती है। आइए हम आपको बताते हैं कि केला खाने के क्या-क्या फायदे हो सकते हैं।


केले के लाभ

  • केले में पोटैशियम पाया जाता है, जो कि ब्लड प्रेशर के मरीज के लिए बहुत फायदेमंद है।
  • ज्यादा शराब पीने से हैंगओवर को उतारने में केले का मिल्‍क शेक बहुत फायदेमंद होता है।
  • केले का शेक पेट को ठंडक पहुंचाता है।
  • केले में काफी मात्रा में फाइबर पाया जाता है।
  • केला पाचन क्रिया को सुचारु करता है।
  • अल्सर के मरीजों के लिए केले का सेवन फायदेमंद होता है।
  • केले में आयरन भरपूर मात्रा में होता है, जिसके कारण खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है।
  • तनाव कम करने में भी मददगार है केला।
  • केले में ट्राइप्टोफान नामक एमिनो एसिड होता है जिससे मूड को रिलैक्स होता है।

केले के अन्य फायदे

दिल के लिए – दिल के मरीजों के लिए केला बहुत फायदेमंद होता है। हर रोज दो केले को शहद में डालकर खाने से दिल मजबूत होता है और दिल की बीमारियां नहीं होती हैं।

नकसीर के लिए – अगर नाक से खून निकलने की समस्या है तो केले को चीनी मिले दूध के साथ एक सप्ताह तक इस्तेमाल कीजिए। नकसीर का रोग समाप्त हो जाएगा।

वजन बढ़ाने के लिए – वजन बढ़ाने के लिए केला बहुत मददगार होता है। हर रोज केले का शेक पीने से पतले लोग मोटे हो सकते हैं। इसलिए पतले लोगों को वजन बढाने के लिए केले का सेवन करना चाहिए।

गर्भवती के लिए – गर्भावस्‍‍था के दौरान महिलाओं को सबसे ज्यादा विटामिन व मिनरल्स की आवश्यकता होती है। इसलिए गर्भवती को यह सलाह दी जाती है कि वह अपने आहार में केला अवश्य शामिल करें।

बच्चों के लिए – बच्चों के विकास के लिए केला बहुत फायदेमंद होता है। केले में मिनरल और विटामिन पाया जाता है जिसका सेवन करने से बच्चों का विकास अच्छे से होता है। इसलिए बच्चों की डाइट में केले को जरूर शामिल करना चाहिए।

बुजुर्गों के लिए फायदेमंद – केला बुजुर्गों के लिए सबसे अच्छा फल है। क्योंकि इसे बहुत ही आसानी से छीलकर खाया जा सकता है। इसमें विटामिन-सी, बी6 और फाइबर होता है जो बढ़ती उम्र में जरूरी होता है। बूढों में पेट के विकार को भी यह समाप्त करने में मददगार है।



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Wednesday, 15 October 2014

दर्द निवारक दवाएं: दुष्प्रभाव और सावधानियां

दर्द निवारक दवाएं: दुष्प्रभाव और सावधानियां


मित्रों , हम सबने कभी न कभी दर्द निवारक दवाओं का अपने जीवन में प्रयोग किया होगा. यदि कभी आपका सर दर्द करता है तो आप सोचते होंगे की चलो कोम्बिफ्लैम या ब्रुफिन खा ली जाय तो दर्द ठीक हो जाएगा. कुछ समय के लिए इससे आराम भी मिल जाता है. परन्तु अगर ऎसी दवाओं को रोज ही लेने की आदत पड़ जाए तो न केवल यह शरीर के लिए नुक्सानदायक होता है बल्कि इससे होने वाले साइड एफ्फेक्ट्स से मृत्यु तक हो सकती है.
drug-painkillersआजकल बाज़ार में अलग अलग कॉम्बिनेशन की अनेक दर्द निवारक दवाएं या पेनकिलर्स मौजूद हैं. इनका केमिकल कम्पोजीशन रोग के अनुसार अलग अलग होता है. इनमें से कुछ पेनकिलर्स ऐसे भी हैं जिनको अगर बिना उचित सलाह के अपनी मर्ज़ी से खाया जाय तो इनकी लत लग जाती है और भयानक बीमारियाँ भी हो जाती हैं. रोगी को इन दवाओं का गुलाम बनकर हमेशा इन पर निर्भर रहना पड़ता है. साधारण से दर्द को ठीक करने की कोशिश में लोग बिना डॉक्टर की सलाह के अनाप शनाप दवाएं खाने लगे हैं जिससे इन गोलियों के एडिक्शन की खतरनाक बीमारी के चंगुल में फंसते जा रहे हैं. यदि कभी इन दवाओं को लोग बंद भी करना चाहें और अचानक बंद कर दें तो इनके विदड्रोल सिम्पटम के कारण अनेक समस्याएं उठ खड़ी होती हैं जैसे-हाथ पैरों का कांपना, बैचैनी, गुस्सा, डायरिया, छींकें, अनिद्रा, नाक से पानी बहना आदि.

आइये पेन किलर्स से साइड इफेक्ट्स जानेंDrug-Rehab-Medicatioन

Gastritis- 
पेन किलर्स के ज़्यादा प्रयोग से सीने मं जलन, पेट दर्द, खट्टी डकारें और उलटी आने की समस्याएं होने लगती हैं. इसके बाद धीरे धीरे पेट में सूजन आ जाती है और उसमें घाव बनने लगते हैं. इसके बाद उसमें से खून भी बहने लगता है.
लिवर में सूजन-
अनेक मरीजों दर्द निवारक दवाओं के अधिक प्रयोग के कारण लिवर की सेल्स टूटने लगती हैं और भूख कम लगने लगती है.
किडनी की समस्याएं- 
दर्द निवारक दवाओं के अधिक प्रयोग के कारण किडनी खराब होने के केसेस बदते ही जा रहे हैं. किडनी की सेल्स डैमेज होने के कारण वो ठीक से काम नहीं कर पाती हैं.
ब्लड डिस्क्रैसिया- 
पेन किलर ज़्यादा लेने से खून की रासायनिक संरचना बदलने लगती है और इसे ब्लड डिस्क्रैसिया कहते हैं. इससे रोगियों की मृत्यु तक हो जाती है.
अस्थमा-
कुछ रोगियों को इन दवाओं के विपरीत प्रभावों के कारण अस्थमा भी हो जाता है.
मानसिक बीमारियाँ- 
इन समस्याओं में प्रमुख हैं-विचार शून्यता, याददाश्त कमज़ोर हो जाना, भ्रम, शक और वहां होने लगना और अन्य तरह की भावनात्मक समस्याएं उत्पन्न हो जाना.
माइग्रेन-
किसी किसी मरीज़ को दर्द निवारक दवाएं ज्यादा लेने से माइग्रेन की भी समस्या होने लगती है.

हमेशा ध्यान रखें कि-Pain-When

1.दर्द कम करने के लिए ली जाने वाली कोई भी दवा सिर्फ उतने समय तक ही लें जब तक उसे आपके डॉक्टर ने कहा हो. एक बार दर्द खत्म होने के बाद दवा बंद कर दें और शौकिया तौर पर इसे नहीं लें.
2.अगर फिर इसी तरह का दर्द आपको होने लगे तो ये नहीं सोचें कि डॉक्टर ने पिछली बार जो दवा दी थी उसी को ले ली जाए और डॉक्टर की फीस बचा ली जाय. लोगों कि इसी प्रवृत्ति के कारण दवाओं के ज़्यादा साइड इफेक्ट्स हो रहे हैं.
3.अधिकांश पेनकिलर्स को खाने के बाद लेने की सलाह दी जाती है. इसे खाली पेट नहीं लें.
4.शराब इत्यादि से दूर रहें- पेनकिलर्स और शराब दोनों से एसिडिटी बनती है इसलिए दोनों को अगर एकसाथ लिया जाय तो एसिडिटी ज़्यादा होगी. शराब और पेन किलर्स को एक साथ सेवन हार्ट अटैक भी कर सकता है. इसलिए सावधान रहें.
5.शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें. दवा सेवन के दौरान यथा संभव पानी पीते रहें. कम पानी पीने से किडनी से विषाक्त पदार्थ नहीं निकलेंगे और किडनी खराब हो सकती है.
6.कभी कभी कुछ गोलियों को निगलने की बजाय चबाकर खाते हैं. ऐसे में दवा की पूरी डोज तेजी से शरीर में घुलता है और कई बार हमारा शरीर उसके प्रभाव को संभाल नहीं पाता. यह दवा के ओवरडोज की तरह असर करता है. इसलिए अगर आपको पूरी एक टैबलेट लेनी है तो उसे तोड़कर लेने के बजाय पूरी ही खाएं.
7.एक बार में एक से अधिक पेन किलर दवा नहीं लें. दर्द कितना भी तेज हो या कैसा भी हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप बिना अपने डॉक्टर की सलाह के ज्यादा पेन किलर लें. किसी भी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह से ही कोई दवा लें.
8.याद रखें ये केमिकल्स हैं जिसे बिना डॉक्टरी सलाह के अधिक मात्रा में लेने से आपके शरीर को जानलेवा नुक्सान भी हो सकता है.
9.अगर रोगी को पेनकिलर का एडिक्शन हो गया है तो उसे मनोचिकित्सक से इलाज करवाएं. इसमें रोगी को नशामुक्त होने की तरह से ही कुछ समय इलाज करवाना पड़ता है और कुछ समय में रोगी ठीक हो जाता है. कुछ रोगियों को नशामुक्ति के इलाज़ के साथ साथ काउंसिलिंग की भी ज़रूरत होती है. आमतौर पर इस पूरी प्रक्रिया में 4-6 माह लग जाते हैं.
जनहित में यह जानकारी शेयर करें.
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥
धन्यवाद !!!!
आपका अपना,
डॉ.स्वास्तिक
चिकित्सा अधिकारी
(आयुष विभाग, उत्तराखंड शासन)
(ये सूचना सिर्फ आपके ज्ञान वर्धन हेतु है. किसी भी गम्भीर रोग से पीड़ित होने पर चिकित्सक के परामर्श के बाद अथवा लेखक के परामर्श के बाद ही कोई दवा लें. पब्लिक हेल्थ के अन्य मुद्दों तथा जनहित के लिए सुझावों के लिए लेखक से drswastikjain@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है.)

Friday, 5 September 2014

बवासीर आयुर्वेद चिकित्सा व घरेलू नुस्ख़े


आजकल आधुनिक परिवेश गलत खान-पान और अधिकाधिक मांसाहार प्रवृत्ति से सीधे ताल्लुक रखने वाले लोग पेट की समस्या से जूझ रहे हैं जिसके कारण (पाइल्स, भगंदर या नासूर (फिस्टुला) और गुद्चीर (फिशर) से ग्रसित हो रहे हैं !
कुछ रोगी शुरुआत में इन रोगों को शर्म के कारण छुपाते रहते हैं और यह रोग धीरे धीरे गंभीरता को धारण कर लेता है !
नीम हकीमों और झोला छाप डॉक्टरों के भ्रामक विज्ञापन जाल से यह और अधिक बढ जाता है !

बवासीर क्या है- ?

-बवासीर गुदाद्वार के निचले हिस्से में मौजूद रक्त शिराओं में आने वाली सूजन है। हालांकि यह गुदाद्वार के भीतर होता है, लेकिन कई बार आप इसे गुदाद्वार के बाहर भी एक उभरे हुए मस्सों के रूप में महसूस कर सकते हैं। इस स्थिति को 'प्रोलैप्स' बवासीर कहते हैं। अकसर तीन में से एक व्यक्ति को किसी न किसी उम्र में बवासीर अवश्य होता है।

-कैसे पता लगे कि मुझे बवासीर है-?

-बवासीर एक तकलीफ दायक स्थिति है, इसमें शुरुआत में गुदाद्वार के सिरे पर खुजली आती है और अगर बवासीर की तकलीफ बढ ज़ाए तो इस जगह पर दर्द भी होता है और कई बार खून भी आने लगता है। आप को गुदाद्वार के हिस्से में भारीपन सा महसूस होता है या फि शौच के समय तकलीफ या दर्द भी होता है। शौच के बाद कई बार आपको अंदर के कपडो पर खून के धब्बे भी नजर आते हैं। यदि आप का बवासीर मस्से के रूप में बाहर आ जाए तो शौच के बाद धोते समय आप इन मस्सों को अपने हाथों पर भी महसूस कर सकते हैं।

-यह क्यों होता है-?

-इसका सबसे मुख्य कारण है कब्ज की परेशानी, अकसर कब्ज से ग्रस्त व्यक्ति शौच के समय काफी जोर लगाते हैं। इससे गुदाद्वार की नसों पर दवाब पडता है। जिसके परिणामस्वरूप ये नसें सूजकर बडी हो जाती है और मसों का रूप ले लेती है। गर्भावस्था और प्रसूति के दौरान यह समस्या ज्यादा होती है जिसके कारण बवासीर होने का भ्रम भी हो जाता है।

-क्या शुरुआत में ही इसे रोकने का कोई उपाय है-?

-आप जितना ज्यादा हो सके अपने भोजन में रेशेदार पदार्थ ज्यादा शामिल करें। खाद्यान्न अधिक खाएं, फल व सब्जी का उपयोग ज्यादा करें। रेशेदार और तरल पदार्थ आप के मल को कम कर देते हैं। जिससे यह आंतों के जरिए सहजता से फिसलकर बाहर आ जाता है। यानि आप अपने भोजन में अतिरिक्त रेशेदार पदार्थ शामिल करना चाहें या अपने वजन पर नियंत्रण रखना चाहें तो अपने डॉक्टर से अपनी आहार तालिका संबंधी सलाह लें।
-कुछ लोग शल्य क्रिया करवा लेते हैं परन्तु यह रोग पेट की खराबी के कारण फिर से हो जाता है !
इसीलिए इन रोगों में आयुर्वेद अमृत तुल्य कार्य करता है इससे रोग जड से समाप्त हो जाता है !
-एक बार बवासीर की तकलीफ से छुटकारा पाने के बाद, इसे दोबारा होने से रोकने के लिए आपको कइ तरह की सावधानियां अपनानी चाहिए -
-जैसे:- ध्यान रखें, अपने भोजन में अधिक रेशेदार पदार्थ शामिल करें और हर दिन ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। फास्ट-फूड से परहेज करें। नियमित समय पर भोजन की आदत डालें। एक बार में कम भोजन करें, थोडे-थोडे समय के अवसर पर कई बार खाएं, धीरे-धीरें खाएं, भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं। भोजन में ताजे फल, पत्ते वाली सब्जियां और सलाद अधिक खाएं। तनावमुक्त रहने की कोशिश करें। नियमित व्यायाम करें, योगा व ध्यान से खुद को तनावमुक्त बनााएं। मल त्याग करते समय ताकत न लगाएं। सही भोजन और ज्यादा पानी पीने से आपका मल बिना किसी तकलीफ के आसानी से अपने आप बाहर आ जाएगा।

ऐसा न करें

तीखे चटपटे और मसालेदार या तला हुआ भोजन न खाएं। धूम्रपान न करें। पान, तंबाकू, गुटखा या पान मसाला न खााएं। कडक़ चाय या काफी न पिएं। मद्यपान या कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन न करें।
-कुछ कब्ज से छुटकारा पाने के उपाय -
-एरंड तैल 20ml प्रति सप्ताह
-पंचसकार या त्रिफला या इसबगोल चूर्ण सोते समय
-अभ्यारिषट या कुमारी आसव 20ml भोजन उपरांत !
-अधिक जानकारी के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें ! या 09818069989 पर हमें कॉल करें.
लेख़क: 
डॉ नवीन चौहान
कंसलटेंट आयुर्वेद फिजिशियन व बवासीर भगंदर विशेषज्ञ 
मोबाइल : ०९८१८०६९९८९

आयुर्वेद और भोजन

आयुर्वेद अनुसार भोजन के तीन प्रकार


हर व्यक्ति का खान-पान उसके संस्कार और संस्कृति के अनुसार होता है। खान-पान में युगों से जो पदार्थ प्रयोग किए जाते रहे हैं, आज भी उन्हीं पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। यह अवश्य है कि इन विभिन्न खाद्य पदार्थों में कुछ ऐसे हैं जो बहुत फायदेमंद होते हैं, तो कुछ ऐसे जो बेहद नुकसानदायक होते हैं। इसी आधार पर प्राचीनकाल में वैद्यों ने आहार को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बाँटा था-

सात्विक भोजन
यह ताजा, रसयुक्त, हल्की चिकनाईयुक्त और पौष्टिक होना चाहिए। इसमें अन्ना, दूध, मक्खन, घी, मट्ठा, दही, हरी-पत्तेदार सब्जियाँ, फल-मेवा आदि शामिल हैं। सात्विक भोजन शीघ्र पचने वाला होता है। इन्हीं के साथ नींबू, नारंगी और मिश्री का शरबत, लस्सी जैसे तरल पदार्थ बहुत लाभप्रद हैं। इनसे चित्त एकाग्र तथा पित्त शांत रहता है। भोजन में ये पदार्थ शामिल होने पर विभिन्न रोग एवं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से काफी बचाव रहता है।

राजसी भोजन
इसमें सभी प्रकार के पकवान, व्यंजन, मिठाइयाँ, अधिक मिर्च-मसालेदार वस्तुएँ, नाश्ते में शामिल आधुनिक सभी पदार्थ, शक्तिवर्धक दवाएँ, चाय, कॉफी, कोको, सोडा, पान, तंबाकू, मदिरा एवं व्यसन की सभी वस्तुएँ शामिल हैं। राजसी भोज्य पदार्थों के गलत या अधिक इस्तेमाल से कब, क्या तकलीफें हो जाएँ या कोई बीमारी हो जाए, कहा नहीं जा सकता। 

इनसे हालाँकि पूरी तरह बचना तो किसी के लिए भी संभव नहीं, किंतु इनका जितना कम से कम प्रयोग किया जाए, यह किसी भी उम्र और स्थिति के व्यक्ति के लिए लाभदायक रहेगा। वर्तमान में होनेवाली अनेक बीमारियों का कारण इसी तरह का खानपान है, इसलिए बीमार होने से पहले इनसे बचा जाए, वही बेहतर है। 
  इसमें सभी प्रकार के पकवान, व्यंजन, मिठाइयाँ, अधिक मिर्च-मसालेदार वस्तुएँ, नाश्ते में शामिल आधुनिक सभी पदार्थ, शक्तिवर्धक दवाएँ, चाय, कॉफी, कोको, सोडा, पान, तंबाकू, मदिरा एवं व्यसन की सभी वस्तुएँ शामिल हैं।      


तामसी भोजन
इसमें प्रमुख मांसाहार माना जाता है, लेकिन बासी एवं विषम आहार भी इसमें शामिल हैं। तामसी भोजन व्यक्ति को क्रोधी एवं आलसी बनाता है, साथ ही कई प्रकार से तन और मन दोनों के लिए प्रतिकूल होता है।

खान-पान की खास बातें

* जब जल्दी में हों, तनाव में हों, अशांत हों, क्रोध में हों तो ऐसी स्थिति में भोजन न किया जाए, यही बेहतर है। 

* आयुर्वेद के अनुसार जो मनुष्य खाना खाता है, शरीर के प्रति उसका कर्तव्य है कि वह व्यायाम अवश्य करें। 

* बुजुर्गों के लिए टहलना ही पाचन के लिए पर्याप्त व्यायाम है। 

* भोजन ऋतु, स्थान और समय के अनुसार ही करें। बार-बार न खाएँ। यदि समय अधिक निकल जाए तो भोजन न करना ज्यादा अच्छा है। 

* भोजन के साथ पानी न पीएँ। आधे घंटे पहले और एक घंटे बाद पीएँ। 

* भूख को टालना ठीक नहीं। यह शरीर के लिए नुकसानदायक है। 

* दिनभर में इतना काम अवश्य करें कि शाम को थकावट महसूस हो। इससे भूख लगेगी और नींद भी अच्छी आएगी।

Thursday, 4 September 2014

भरपूर नींद के फायदे

भरपूर नींद के फायदे


एक पुरानी कहावत है, अगर आपको अच्छी नींद आती है, तो समझिए कि आपके साथ सब ठीक है। अच्छी नींद के कई फायदे हैं। यह बात कई वैज्ञानिक शोधों में प्रमाणित हो चुकी है। भरपूर नींद लेने से आप ज्यादा स्वस्थ और सुंदर हो सकते है। गहरी नींद सोने वाला दिन भर तरोताजा महसूस करता है। उसका मन प्रसन्न रहता है, वह कई रोगों से भी दूर रहता है। उसके शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है। हर काम में उसका मन भी लगा रहता है। शरीर को रिचार्ज करने और स्वस्थ बनाने के लिए भी भरपूर नींद बहुत जरूरी है। आइए हम आप को बताते है कि भरपूर नींद लेने के क्या फायदे है


संतुलित वजन

कम सोने वालों का वजन भरपूर सोने वालों से ज्यादा होता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि पांच घंटे की नींद लेने वाले लोगों में भूख बढ़ाने वाला हार्मोन 15 फीसदी अधिक बनता है। वहीं आठ घंटे की नींद लेने वाले लोगों में यह हार्मोन सामान्य मात्रा में ही बनता है। 

अच्छी याद्दाश्त
 पर्याप्त नींद लेने का सकारात्म्क असर याद्दाश्त पर भी पड़ता है। 8 घंटे की नींद सोने वाले लोग सीखी हुई चीजों को अच्छी तरह से याद रख पाते हैं। जबकि देर रात तक काम करने वाले लोगों की सोचने की क्षमता कम हो जाती है।

बीमारियों से बचाव 
गहरी नींद से सोकर उठने पर आप स्वयं को तरोताजा तो महसूस करते ही हैं, साथ ही शरीर में रोगों से लड़ने वाली कोशिकाएं भलीभांति काम करती है। जिससे रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है। भरपूर नींद सोने वालों में सर्दी जुकाम और अल्सर जैसी बीमारियां भी कम होती हैं।

कार्यक्षमता का बढना
रात में गहरी नींद लेने के बाद दूसरे दिन जो चुस्ती एवं ताजगी महसूस होती है वह किसी टॉनिक के सामान होती है। इससे आपकी कार्यक्षमता बढती है और आप बेहतर काम कर पाते है। आप भी अपनी कार्यक्षमता बढ़ाना चाहते है, तो अच्छी नींद लीजिए।

दीर्घायु होना 
भरपूर नींद लेने वालों में बढती उम्र के कई लक्षण पाए जाते है। एक शोध में यह पाया गया कि प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की नींद लेने वाले 4.5 घंटे से कम सोने वालों की तुलना में लम्बी उम्र जीते हैं।

बच्चों की मानसिकता पर प्रभाव
पर्याप्त नींद न लेने से किशोरों में डिप्रेशन और आत्मविश्वास की कमी आ जाती है। आठ घंटे से कम नींद लेने वाले किशोरों में सिगरेट और शराब की लत ज्यादा पाई जाती है। साथ ही कम नींद लेने वाले विद्यार्थी बात-बात पर उग्र होकर मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। जबकि पर्याप्त नींद लेने वाले किशोर इन सब से दूर रहते है।

भरपूर नींद न लेने पर कई बीमारियॉ जैसे- आँखों में सूजन होना, स्मरण शक्ति में कमी आना, आलस्य, थकान, तनाव, कमजोरी, डायबिटीज, मोटापा, और हाई ब्ल्डप्रेशर आपको घेर सकती हैं इसलिए स्वस्थ रहने के लिए भरपूर नींद लेने बेहद जरूरी है। अतः सारी चिंताओं, परेशानियों, तनाव आदि से दूर रहकर आप को अच्छी नींद लेनी चाहिए।

Saturday, 30 August 2014

मधुमेह (Diabetes) एवं आयुर्वेद : कारण, लक्षण व उपचार



मधुमेह (डायबिटीज ) नामक रोग में व्यक्ति बार-बार अधिक मात्र में क्लेद युक्त गाढ़ी चिपचिपी मूत्र करता है ,
मधुमेह दो शब्दों को मिलाकर बना है मधु और मेह, मधु यानि मधुर ,मीठा और मेह यानि पेशाब ।
मेहन का अर्थ है मुत्रेंद्रिया जिसके द्वारा मूत्र निसरण (निकलता है ) किया जाता है ....पीड़ित व्यक्ति पुनः पुनः अधिक मात्र में पेशाब करता है ,अत्यधिक थकान और दुर्बलता का अनुभव करता है ।

रक्त में शर्करा की मात्र अत्यधिक बढ़ जाने से शारीर के अंगों पर इसके बहुत सारे दुष्प्रभाव होते हैं -
सामान्य व्यक्ति में आहार से उत्पन्न शर्करा का अग्नाशय में पाचन होता है जिसमे इंसुलिन नामक होर्मोने के सहयोग से चयापचय होता है , लेकिन मधुमेह में अग्नाशय में इंसुलिन के निर्माण के हेतु महत्त्वपूर्ण बीटा सेल नष्ट हो जाते हैं, जिससे इंसुलिन का निर्माण नहीं होता .... कई बार जेनेटिक अब्नोर्मलिटी के कारण इंसुलिन मोलेकुल का रिसेप्टर उसे एक्सेप्ट नहीं करता ....... जिसके कारण शर्करा का उपयोग शारीर में उर्जा उत्पन्न करने के लिए नहीं होता ....और अतिरिक्त शर्करा रक्त में ही रह जाती है जो की खतरनाक है ।

मधुमेह के रोगी का शारीर दुर्बल हो जाता है ,क्लेद की अधिकता से शारीर के धातु (शारीर के मूलभूत तत्त्व रस, रक्त, मांस, इत्यादि ) का गलन होने लगता है .रक्त में शर्करा की मात्रा अधिक होने के कारण यदि कोई संक्रमण होता है तो वह मुश्किल से ठीक हो पाता है । रक्त में बढ़ी शर्करा जीवाणुओं के बढ़त के लिए उत्तम माध्यम का काम करती है ।

मधुमेह के सामान्य कारण -1.अत्यधिक मात्रा में गरिष्ठ ,घी तेल चिकनाई युक्त आहार , देर में पचने युक्त आहार का सेवन करना ।
2.नए अन्न यानि के एक वर्ष से पहले उगाया हुआ अन्ना नवान्न होता है ,हमेशा एक वर्ष पुराने अनाज का सेवन करें ,क्योंकि नए अन्न में क्लेद की मात्र अधिक होती है जिस से मधुमेह होने की सम्भावना होती है ,मधुमेह के रोगी भी इसका परहेज करें ।
3.अधिक मात्र में गुड ,चावल श्रीखंड इत्यादि का सेवन करना ,आटे के व्यंजन जैसे मठरी बालुशाई इत्यादि ।
4. दिवा स्वप्न यानि की दिन में सोना , यह कफ वर्धक होता है , एक आसन पर अधिक समय तक बैठे रहना , पैदल नहीं चलना, लगातार ए. सी. में बैठे रहना और व्यायाम का अभाव से मधुमेह हो सकता है ।
5. मानसिक कारण जैसे चिंता भय उद्वेग और तनाव ग्रस्त जीवन एक प्रमुख कारण है ।
6. अनुवांशिक कारण भी महत्त्वपूर्ण है ।
7. अधिक मात्रा में शराब , पिज़्ज़ा , बर्गर , देर से पचने वाले आहार का लगातार सेवन ।
इन कारणों से मधुमेह रोग की उत्पत्ति होती है।

उपचार एवं आहार -
1. रोग से सम्बंधित लक्षण नजर आने पर अपने पास के आयुर्वेद के डॉक्टर को दिखाना चाहिए। आयुर्वेद में इस रोग का अच्छा उपचार मौजूद है।
2. इस रोग से बचने के लिए जिन कारणों से यह रोग होता है उनका त्याग करना चाहिए, रोग से पीड़ित व्यक्ति को अपने खून में मौजूद शुगर के लेवल की काम से काम सप्ताह में एक बार जाँच जरूर करनी चाहिए।
3. जामुन , करेला , आमला, गिलोय का सेवन करना चाहिए , पानी अधिक पीना चाहिए , सुबह के समय खुली हवा में टहलना चाहिए। त्रिफला और शिलाजीत का सेवन भी लाभदायक होता है।
4. गोंद, बेसन , सोंठ , हल्दी को मिलाकर लड्डू बना लें इनका सेवन दिन में दो बार करें लड्डू में मीठा न मिलाये , लड्डू को गूंथने के लिए ओलिव आयल या सोयाबीन के तेल का प्रयोग करें।
इन बातों का ध्यान रखकर आप इस रोग से बच सकते है।


लेखक:
डॉ. अभिषेक गोयल 
अशोकनगर, मध्यप्रदेश 

Friday, 29 August 2014

एलर्जी: कारण, लक्षण एवं आयुर्वेद उपचार

एलर्जी: कारण, लक्षण एवं आयुर्वेद उपचार
एलर्जी या अति संवेदनशीलता आज की लाइफ में बहुत तेजी से बढ़ती हुई सेहत की बड़ी परेशानी है कभी कभी एलर्जी गंभीर परेशानी का भी सबब बन जाती है जब हमारा शरीर किसी पदार्थ के प्रति अति संवेदनशीलता दर्शाता है तो इसे  एलर्जी कहा जाता है और जिस पदार्थ के प्रति प्रतिकिर्या दर्शाई जाती है उसे एलर्जन कहा जाता है l

एलर्जी  के कारण –
एलर्जी किसी भी पदार्थ से ,मौसम के बदलाव से या आनुवंशिकता जन्य हो  सकती है एलर्जी के कारणों में धूल ,धुआं ,मिटटी पराग कण, पालतू या अन्य जानवरों के संपर्क में आने से ,सौंदर्य प्रशाधनों से ,कीड़े बर्रे आदि के काटने से,खाद्य पदार्थों से एवं कुछ अंग्रेजी दवाओ के उपयोग से एलर्जी हो सकती है सामान्तया एलर्जी नाक ,आँख ,श्वसन  प्रणाली ,त्वचा  व खान पान से सम्बंधित होती है किन्तु कभी कभी पूरे शरीर में एक साथ भी हो सकती है जो की गंभीर हो सकती है l
 स्थानानुसार  एलर्जी  के  लक्षण  -
  •  नाक    की  एलर्जी -नाक  में  खुजली होना ,छीकें आना ,नाक  बहना ,नाक  बंद होना  या  बार  बार जुकाम  होना आदि l
  • आँख की एलर्जी -आखों में लालिमा ,पानी आना ,जलन होना ,खुजली आदि l
  • श्वसन संस्थान की एलर्जी -इसमें खांसी ,साँस लेने में तकलीफ एवं अस्थमा जैसी गंभीर समस्या हो सकती  है l
  • त्वचा की एलर्जी -त्वचा की एलर्जी काफी कॉमन है और बारिश का मौसम त्वचा की एलर्जी के लिए बहुत ज्यादा    मुफीद है त्वचा की एलर्जी में त्वचा पर खुजली होना ,दाने निकलना ,एक्जिमा ,पित्ती  उछलना आदि होता है l
  • खान पान से एलर्जी -बहुत से लोगों को खाने पीने  की चीजों जैसे दूध ,अंडे ,मछली ,चॉकलेट  आदि से एलर्जी  होती  है l
  • सम्पूर्ण शरीर की एलर्जी -कभी कभी कुछ लोगों में एलर्जी से गंभीर स्तिथि उत्पन्न हो जाती है और सारे शरीर में  एक साथ गंभीर लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं ऐसी स्तिथि में तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाना चाहिए l
  • अंग्रेजी दवाओं से एलर्जी-कई अंग्रेजी दवाएं भी एलर्जी का सबब बन जाती हैं जैसे पेनिसिलिन का  इंजेक्शन जिसका रिएक्शन बहुत खतरनाक होता है और मौके पर ही मोत हो जाती है इसके अलावा  दर्द की गोलियां,सल्फा ड्रग्स एवं कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी सामान्य से गंभीर एलर्जी के लक्षण उत्पन्न  कर सकती हैं l
  • मधु मक्खी ततैया आदि का काटना –इनसे भी कुछ लोगों में सिर्फ त्वचा की सूजन और दर्द की  परेशानी होती है जबकि कुछ लोगों को  इमर्जेन्सी में जाना पड़ जाता है l
एलर्जी  से  बचाव - एलर्जी से बचाव ही एलर्जी का सर्वोत्तम इलाज है इसलिए एलर्जी से बचने के लिए इन उपायों का पालन करना चाहिए 1.य़दि आपको एलर्जी है तो सर्वप्रथम ये पता करें की आपको किन किन चीजों से एलर्जी है इसके लिए आप ध्यान  से अपने खान पान और रहन सहन को वाच करें l
  • घर के आस पास गंदगी ना होने दें  l
  • घर में अधिक से  अधिक  खुली और ताजा हवा आने का मार्ग  प्रशस्त करें  l
  • जिन खाद्य  पदार्थों  से एलर्जी है उन्हें न खाएं l
  • एकदम गरम से ठन्डे और ठन्डे से गरम वातावरण में ना जाएं l
  • बाइक चलाते समय मुंह और नाक पर रुमाल बांधे,आँखों पर धूप का अच्छी क़्वालिटी का चश्मा  लगायें l
  • गद्दे, रजाई,तकिये के कवर एवं चद्दर आदि समय समय पर गरम पानी से धोते रहे l
  • रजाई ,गद्दे ,कम्बल आदि को समय समय पर धूप दिखाते रहे l
  • पालतू  जानवरों से एलर्जी है तो उन्हें घर में ना रखें l
  • ज़िन पौधों के पराग कणों से एलर्जी है उनसे दूर रहे l
  • घर में मकड़ी वगैरह के जाले ना लगने दें समय समय पर साफ सफाई करते रहे l
  • धूल मिटटी से बचें ,यदि धूल मिटटी भरे वातावरण में काम करना ही पड़ जाये तो फेस मास्क पहन कर काम करेंl
  • नाक की एलर्जी -जिन लोगों को नाक की एलर्जी बार बार होती है उन्हें सुबह भूखे पेट 1 चम्मच गिलोय और 2 चम्मच आंवले के रस में 1चम्मच शहद मिला कर कुछ समय तक लगातार लेना चाहिए इससे नाक की एलर्जी में आराम आता है ,सर्दी में घर पर बनाया हुआ या किसी अच्छी कंपनी का च्यवनप्राश  खाना भी नासिका एवं साँस की   एलर्जी से बचने में सहायता करता है आयुर्वेद की दवा सितोपलादि पाउडर एवं गिलोय पाउडर को 1-1 ग्राम की मात्रा   में सुबह शाम भूखे पेट शहद के साथ कुछ समय तक लगातार लेना भी नाक एवं श्वसन संस्थान की एलर्जी में बहुत आराम देता है
  • जिन्हे  बार बार त्वचा की एलर्जी होती है उन्हें मार्च अप्रेल के महीने में जब नीम के पेड़ पर कच्ची  कोंपलें आ रही हों उस समय 5-7 कोंपलें 2-3 कालीमिर्च के साथ अच्छी तरह चबा चबा कर 15-20 रोज तक खाना  त्वचा के रोगों से बचाता है, हल्दी से बनी आयुर्वेद की दवा हरिद्रा खंड भी त्वचा के एलर्जी जन्य रोगों में बहुत गुणकारी  है इसे किसी आयुर्वेद चिकित्सक की राय से सेवन कर सकते हैं l
सभी एलर्जी जन्य रोगों में खान पान और रहन सहन का बहुत महत्व है इसलिए अपना खान पान और रहन सहन ठीक रखते हुए यदि ये उपाय अपनाएंगे  तो अवश्य एलर्जी से लड़ने में सक्षम होंगे और एलर्जी जन्य रोगों से बचे रहेंगे एलर्जी जन्य रोगों में अंग्रेजी दवाएं रोकथाम तो करती हैं लेकिन बीमारी को जड़ से ख़त्म नहीं करती है जबकि आयुर्वेद की दवाएं यदि नियम पूर्वक ली जाती है तो रोगों को जड़ से ख़त्म करने की ताकत रखती हैं l

Thursday, 28 August 2014

मुंह के छालों के लिए घरेलु नुस्खे

मुंह के छालों के लिए घरेलु नुस्खे 

मुंह में छाले होने का मुख्य कारण कब्ज तथा अजीर्ण है| इसके साथ ही मांस, मछली, अंडा, मिर्च, तेल, सोंठ, गरम मसालों से युक्त भोजन अधिक मात्रा में सेवन करने से मुंह में छाले उभर आते हैं| तेल तथा तेल में तले हुए पदार्थों और बहुत गरम चीजों को खाने से भी यह रोग हो जाता है| गरम पदार्थ मुख की कोमल श्लेष्मिक कला में प्रदाह उत्पन्न कर देते हैं जिससे गरमी का सीधा प्रभाव मुंह के भीतर दिखाई देने लगता है| पेट की गरमी बढ़ जाती है और पाचन-क्रिया ठीक प्रकार से नहीं हो पाती| दूसरे गरमी के कारण पेट में मल सड़ता रहता है| फिर वह गरमी वायु को ऊपर की ओर खिसकाती है जो मुंह में छाले पैदा कर देती है|


पहचानइस रोग में जीभ के किनारों, तालू तथा होंठो के भीतरी भाग में छोटी-छोटी फुंसियां पैदा हो जाती है| ये फुंसियां कभी-कभी छोटी दिखाई देती है तथा तभी बड़ी मालूम पड़ती हैं| इनमें जलन होती है| इनका रंग लाल होता है| इनमें सुई चुभने जैसी पीड़ा होती है| कभी-कभी खुजली भी होने लगती है| कई बार सारा मुख लाल पड़ने के बाद सूज जाता है| यदि रोग बढ़ जाए तो फुंसियों के पकने की नौबत आ जाती है| मुंह में सूजन आने से प्राय: कुछ भी खाना-पीना मुश्किल हो जाता है|

चिकित्सा
  • कत्थे को महीन पीसकर उसमें थोड़ा-सा शहद मिला लें| फिर इसे छालों पर लगाएं| मुंह झुकाकर लाल नीचे की ओर टपका दें|
  • फूला हुआ सुहागा तथा शहद - दोनों को मिलाकर छालों पर लगाएं|
  • त्रिफला चूर्ण रातो को सोते समय गरम पानी से लेना चाहिए| इससे पेट का कब्ज ढीला पड़ेगा और सुबह मल साफ आएगा| पेट ठीक होते ही छाले अपने-आप सूख जाएंगे|
  • #आंवले का चूर्ण सुबह-शाम 5-5 ग्राम की मात्रा में गरम पानी से लें|
  • रात को सोते समय एक या दो चम्मच #ईसबगोल की भूसी खाकर ऊपर से पानी पी लें|
  • #तुलसी तथा #चमेली के पत्ते चबाकर लाल नीचे टपकाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं|
  • दो चम्मच #शहतूत का शरबत ताजे पानी में डालकर गरारे करें|
  • टमाटर का रस पानी में मिलाकर उससे गरारे करें|
  • साबुत #धनिया को पीसकर चूर्ण बना लें| फिर इस चूर्ण को छालों पर बुरककर लार नीचे गिरा दें|
  • हरा धनिया, सूखा धनिया तथा पुदीना - तीनों 5-5 ग्राम लेकर चटनी बना लें| इस चटनी को जीभ पर लगाकर लाल बाहर गिराते रहें| यह चटनी दिनभर में चार-पांच बार लगाएं|
  • #अमरूद की चार-पांच मुलायम पत्तियों को एक गिलास पानी में उबालें| फिर इस पानी को छानकर कुल्ला करें| इससे मुंह की दुर्गंध भी दूर होती है|
  • भोजन के बाद केवल #सौंफ का पानी पीने से मुंह के छाले सूख जाते हैं| इसके लिए एक गिलास पानी में दो चम्मच सौंफ डालकर औटाएं| फिर पानी को छानकर ठंडा होने के लिए रख दें| यही सौंफ का पानी प्रयोग करें|
  • अंजीर के पेड़ से कच्चे #अंजीरों का दूध इकट्ठा करके छालों पर लगाएं|
  • जायफल को पानी में घिसकर उंगली से जीभ तथा तालू पर लेप करें| लार बाहर निकाल दें|
  • #अरहर की हरी पत्तियों को चबाकर थूक दें| लार पेट में जाने दें| छालों को दूर करने की यह बड़ी कारगर दवा है|
  • #मेहंदी तथा #फिटकिरी - दोनों को बराबर की मात्रा में पीसकर छालों पर लगाएं|
  • लाल #इलायची के छिलकों को सुखाकर पीस लें| फिर इस चूर्ण को पानी में भिगोकर या पानी में पेस्ट बनाकर छालों पर लगाएं|
  • #करेले के रस को पानी में डालकर कुल्ला करने से छाले दूर होते हैं|
  • #मसूर की दाल को आग में भून लें| इसमें समभाग बरेली वाला सफेद कत्था मिलाएं| दोनों को पीसकर मुख में लगाएं| लार नीचे टपका दें|
जौ को आग में जलाकर कोयला कर लें| अब इनको पीस डालें| इसमें दो चुटकी पिसा हुआ कत्था मिलाएं| दोनों का मिश्रित चूर्ण छालों पर लगाएं|
छालों में गाय या भैंस का घी उंगली से लगाएं|
मुलहठी, नीम की पत्तियां तथा मेहंदी की पत्तियां पानी में उबालकर पानी छान लें| फिर इस पानी से गरारे करें|
आम की छाल, पीपल के पेड़ की छाल तथा बबूल की छाल लेकर पानी में औटा लें| फिर इस पानी से बार-बार कुल्ला करें|
बेर के पत्तों को पानी में उबालकर उससे कुल्ला करना चाहिए|
मौलसिरी के पेड़ की छाल को पानी में उबालकर उससे कुल्ला करें|


त्रिफला : एक श्रेष्ठ आयुर्वेदिक औषधि

त्रिफला एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक रासायनिक फ़ार्मुला है जिसमें आंवला, बहेडा और हरड़को बीज निकाल कर समान मात्रा में लिया जाता है। त्रिफला शब्द का शाब्दिक अर्थ है "तीन फल" ।
संयमित आहार-विहार के साथ त्रिफला का सेवन करने वाले व्यक्तियों को ह्रदयरोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, नेत्ररोग, पेट के विकार, मोटापा आदि होने की संभावना नहीं होती। यह कोई 20 प्रकार के प्रमेह, विविध कुष्ठरोग, विषमज्वर व #सूजन को नष्ट करता है। अस्थि,  केश,  दाँत व पाचन- संसथान को बलवान बनाता है। इसका नियमित सेवन शरीर को निरामय, सक्षम व फुर्तीला बनाता है।

औषधि के रूप में त्रिफला
1..रात को सोते वक्त 5 ग्राम (एक चम्मच भर) त्रिफला चुर्ण हल्के गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होता है।
2..त्रिफला व ईसबगोल की भूसी दो चम्मच मिलाकर शाम को गुनगुने पानी से लें इससे कब्ज दूर होता है।
3.इसके सेवन से नेत्रज्योति में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है।
4.सुबह पानी में 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण साफ़ मिट्टी के बर्तन में भिगो कर रख दें, शाम को छानकर पी ले। शाम को उसी त्रिफला चूर्ण में पानी मिलाकर रखें, इसे सुबह पी लें। इस पानी से आँखें भी धो ले। मुँह के छाले व आँखों की जलन कुछ ही समय में ठीक हो जायेंगे।
5.शाम को एक गिलास पानी में एक चम्मच त्रिफला भिगो दे सुबह मसल कर नितार कर इस जल से आँखों को धोने से नेत्रों की ज्योति बढती है।
6.एक चम्मच बारीख त्रिफला चूर्ण, गाय का घी10 ग्राम व शहद 5 ग्राम एक साथ मिलाकर नियमित सेवन करने से आँखों का मोतियाबिंद, काँचबिंदु, द्रष्टि दोष आदि नेत्ररोग दूर होते है। और बुढ़ापे तक आँखों की रोशनी अचल रहती है।
7.त्रिफला के चूर्ण को गौमूत्र के साथ लेने से अफारा, उदर शूल, प्लीहा वृद्धि आदि अनेकों तरह के पेट के रोग दूर हो जाते है।
8.त्रिफला शरीर के आंतरिक अंगों की देखभाल कर सकता है, त्रिफला की तीनों जड़ीबूटियां आंतरिक सफाई को बढ़ावा देती हैं।
9.चर्मरोगों में (दाद, खाज, खुजली, फोड़े-फुंसी आदि) सुबह-शाम 6 से 8 ग्राम त्रिफला चूर्ण लेना चाहिए।
10.एक चम्मच त्रिफला को एक गिलास ताजा पानी मे दो- तीन घंटे के लिए भिगो दे, इस पानी को घूंट भर मुंह में थोड़ी देर के लिए डाल कर अच्छे से कई बार घुमाये और इसे निकाल दे। कभी कभार त्रिफला चूर्ण से मंजन भी करें इससे मुँह आने की बीमारी, मुहं के छाले ठीक होंगे, अरूचि मिटेगी और मुख की दुर्गन्ध भी दूर होगी ।
11.त्रिफला, हल्दी, चिरायता, नीम के भीतर की छाल और गिलोय इन सबको मिला कर मिश्रण को आधा किलो पानी में जब तक पकाएँ कि पानी आधा रह जाए और इसे छानकर कुछ दिन तक सुबह शाम गुड या शक्कर के साथ सेवन करने से सिर दर्द कि समस्या दूर हो जाती है।
12.त्रिफला एंटिसेप्टिक की तरह से भी काम करता है। इस का काढा बनाकर घाव धोने से घाव जल्दी भर जाते है।
13.त्रिफला पाचन और भूख को बढ़ाने वाला और लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि करने वाला है।
14.मोटापा कम करने के लिए त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर ले।त्रिफला चूर्ण पानी में उबालकर, शहद मिलाकर पीने से चरबी कम होती है।
15.त्रिफला का सेवन मूत्र-संबंधी सभी विकारों व मधुमेह में बहुत लाभकारी है। प्रमेह आदि में शहद के साथ त्रिफला लेने से अत्यंत लाभ होता है।
16.त्रिफला की राख शहद में मिलाकर गरमी से हुए त्वचा के चकतों पर लगाने से राहत मिलती है।
17.5 ग्राम त्रिफला पानी के साथ लेने से जीर्ण ज्वर के रोग ठीक होते है।
18.5 ग्राम त्रिफला चूर्ण गोमूत्र या शहद के साथ एक माह तक लेने से कामला रोग मिट जाता है।
19.टॉन्सिल्स के रोगी त्रिफला के पानी से बार-बार गरारे करवायें।
20.त्रिफला दुर्बलता का नास करता है और स्मृति को बढाता है। दुर्बलता का नास करने के लिए हरड़, बहेडा, आँवला, घी और शक्कर मिला कर खाना चाहिए।
21.त्रिफला, तिल का तेल और शहद समान मात्रा में मिलाकर इस मिश्रण कि 10 ग्राम मात्रा हर रोज गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट, मासिक धर्म और दमे की तकलीफे दूर होती है इसे महीने भर लेने से शरीर का सुद्धिकरन हो जाता है और यदि 3 महीने तक नियमित सेवन करने से चेहरे पर कांती आ जाती है।
22.त्रिफला, शहद और घृतकुमारी तीनो को मिला कर जो रसायन बनता है वह सप्त धातु पोषक होता है। त्रिफला रसायन कल्प त्रिदोषनाशक, इंद्रिय बलवर्धक विशेषकर नेत्रों के लिए हितकर, वृद्धावस्था को रोकने वाला व मेधाशक्ति बढ़ाने वाला है। दृष्टि दोष, रतौंधी (रात को दिखाई न देना), मोतियाबिंद, काँचबिंदु आदि नेत्ररोगों से रक्षा होती है और बाल काले, घने व मजबूत हो जाते हैं।
23.डेढ़ माह तक इस रसायन का सेवन करने से स्मृति, बुद्धि, बल व वीर्य में वृद्धि होती है।
त्रिफला से कायाकल्प
1.एक वर्ष तक नियमित सेवन करने से शरीर चुस्त होता है।
2.दो वर्ष तक नियमित सेवन करने से शरीर निरोगी हो जाता हैं।
3.तीन वर्ष तक नियमित सेवन करने से नेत्र-ज्योति बढ जाती है।
4.चार वर्ष तक नियमित सेवन करने से त्वचा कोमल व सुंदर हो जाती है ।
5.पांच वर्ष तक नियमित सेवन करने से बुद्धि का विकास होकर कुशाग्र हो जाती है।
6.छः वर्ष तक नियमित सेवन करने से शरीर शक्ति में पर्याप्त वृद्धि होती है।
7.सात वर्ष तक नियमित सेवन करने से बाल फिर से सफ़ेद से काले हो जाते हैं।
8.आठ वर्ष तक नियमित सेवन करने से वृद्धाव्स्था से पुन: योवन लोट आता है।
9.नौ वर्ष तक नियमित सेवन करने से नेत्र-ज्योति कुशाग्र हो जाती है और सूक्ष्म से सूक्ष्म वस्तु भी आसानी से दिखाई देने लगती हैं।
10.दस वर्ष तक नियमित सेवन करने से वाणी मधुर हो जाती है यानी गले में सरस्वती का वास हो जाता है।