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Friday, 7 November 2014

हेपेटाइटिस - बी आयुर्वेदिक चिकित्सा

हेपेटाइटिस - बी आयुर्वेदिक चिकित्सा 





● संचरण ●


- हेपेटाइटिस बी वायरस का संचरण संक्रमित रक्त या शरीर के रक्त युक्त तरल पदार्थ के संपर्क में आने के परिणामस्वरूप होता है।
-संचरण के संभावित रूपों में असुरक्षित यौन संपर्क, रक्त आधान, संदूषित सुइयों और सिरिंजों का दुबारा उपयोग और माँ से बच्चे को प्रसव के दौरान ऊर्ध्वाधर संचरण शामिल हैं।
-यह एड्स से 50 से 100 गुना अधिक संक्रमित होता है। 

हेपेटाइटिस बी के बचाव

• घाव होने पर उसे खुला न छोड़ें। यदि त्वचा कट फट जाए तो उस हिस्से को डिटॉल से साफ करें।
• शराब ना पिएं।
• किसी के साथ अपने टूथब्रश, रेजर, सुई, सिरिंज, नेल फाइल, कैंची या अन्य ऐसी वस्तुएं जो आपके खून के संपर्क में आती हो शेयर न करें।
• नवजात बच्चों को टीका लगावाएं।

शुरुआती लक्षण 

हिपेटाइटिस के शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे हो सकते हैं, जिसमे डायरिया, थकान, भूख कम लगना, हल्का बुखार, शरीर मे दर्द, पेट मे दर्द, उल्टी और वजन घटना आदि शामिल है। पीलिया जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं.

हिपेटाइटिस मे आयुर्वेद के नियमों से करें लीवर का बचाव 


-डाइट और लाइफस्टाइल मे बदलाव 
-हॉट, स्पाइसी, ऑयली और हेवी खाने से परहेज करें, वेजिटेरियन खाने को प्राथमिकता दें
-रिफाइंड आटा, पॉलिश किया हुआ चावल (व्हाइट राइस), सरसों का तेल, सरसों के बीज, हींग, मटर, प्रिजर्व्ड़ फूड, केक, पेस्ट्री, चॉकलेट, एल्कोहल और सोडा वाले ड्रिंक से परहेज करें।
-होल व्हीट आटा, ब्राउन राइस का इस्तेमाल बढ़ाएँ, खाने मे केला, आम, टमाटर, पालक, आलू, आंवला, अंगूर, मूली, नींबू, सूखे खजूर, किशमिश, बादाम और इलायची ज्यादा शामिल करें।
-इस हालत मे जरूरत से ज्यादा फिजिकल वर्क न करें। पूरा आराम करें। धूप मे आग के पास देर तक न रहें।

कुछ आयुर्वेदिक योग 


  • चम्मच रोस्टेड बार्ली पाउडर 1 कप पानी मे मिलाएँ। इसमे 1 चम्मच शहद डालें और दिन मे दो बार लें।
  • एक चम्मच तुलसी के पत्ते का पेस्ट एक कप मूली के जूस मे मिलाएँ। इसे दिन मे दो बार 15 से 20 दिनों तक इस्तेमाल करें।
  • एक कप गन्ने का रस लें, इसमे आधा चम्मच तुलसी पत्ते का पेस्ट मिलाएँ और दिन मे दो बार लें। यह ध्यान रखें कि जूस हाइजेनिक तरीके से तैयार किया गया हो। उनमें आमलकी (आंवला), विभीतिकी (बहेड़ा), हरीतिकी (हरड़), अमृता (गुरुच), वासा (अडूसा), तिक्ता (चिरैता), कुटकी, भूनिम्ब (कालमेघ) व निम्ब (नीम) शामिल हैं। बनाएं कैसे - सभी औषध एक समान मात्रा में लेकर उसको चार गुना अधिक मात्रा पानी में उबालते हैं। मसलन संपूर्ण औषध की मात्रा अगर 50 ग्राम है तो उसे 200 मिली पानी में उबाल लेते हैं, जब एक भाग यानी 50 मिली रह जाए तो इसे छानकर सुबह खाली पेट पीते हैं।
- एक माह तक लगातार इस काढ़े के सेवन से नतीजा सामने आ जाता है ।

  • आयुर्वेदिक औषधियां जैसे आरोग्यवर्धिनी, पुनार्नावारिस्ट, कुमार्यासव आदि कुशल आयुर्वेद चिकित्सक के देख रेख में ली जा सकती हैं.

□ अधिक जानकारी के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें □

लेखक: 
डॉ. सुरेन्द्र शर्मा 
कंसलटेंट आयुर्वेद फिजिशियन 
संपर्क: 09827206031

Wednesday, 8 October 2014

झुर्रियों से बचाव व उसका उपचार

झुर्रियों से बचाव व उसका उपचार

Skin Wrinkles and its prevention


झुर्रियां अकसर बढ़ती उम्र में सभी में होती है। विशेषकर ज्यादा गर्मी या ज्यादा सर्दी के दौरान चेहरे पर झुर्रियां यानी बूढी रेखाओं के पड़ने की संभावना अधिक बढ़ जाती है.लेकिन आज की जीवनशैली में लगातार बदलाव होने के कारण अब असमय भी झुर्रियां होने लगी हैं।
घरेलू उपचार जो आपके लिए बहुत ही लाभदायक हो सकते हैं।
* गुलाबजल को फ्रीजर में जमाकर इसे नियमित रूप से झुर्रियों वाली जगह पर मलें। त्वचा टाइट रहेगी ।
* गुनगुने पानी से चेहरा अच्छी तरह धोएं फिर उसे खुरदरे तौलिए से रगड-रगड़ कर सुखा लें। आधा चम्मच दुध की ठंडी मलाई में नींबु के रस की चार पाँच बूंदें मिलाकर झुर्रियाँ तब तक मलते रहें जब तक कि मलाई घुलकर त्वचा में समा न जाए।आधा घण्टे बाद पानी से धो डालें परन्तु साबुन का प्रयोग न करें। एक माह तक नियमित इस प्रयोग से झुर्रियाँ दुर होती हैं तथा चेहरे के दाग धब्बे भी गायब हो जाते हैं।
* खीरे के रस या फिर खीरे के छोटे-छोटे पीस काटकर झुर्रियों वाली जगह पर लगाकर उसकी मसाज करें।
* हल्दी या चंदन का लेप लगाने से भी झुर्रियों में लाभ मिलता हैं।
* जब झुर्रियां पडती हैं तो त्‍वचा पर गहरे रंग के धब्‍बे दिखाई देने लगते हैं। इसका मतलब कि मृत कोशिकाएं चेहरे को बूढा बना रहीं हैं। इसको दूर करने के लिए चेहरे पर स्‍क्रबिंग करनी चाहिए जिससे डेड सेल्‍स हट जाएं और नई त्‍वचा सामने आ जाए।
* पके हुए पपीते का एक टुकडा काटकर चेहरे पर घिसें या मसलकर चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद धो लें। ऐसा लगातार करने से चेहरे की झुर्रियाँ दूर होती हैं,व चेहरे की रंगत भी निखरती है।
* त्वचा की झुर्रियाँ मिटाने के लिए आधा गिलास गाजर का रस नित्य खाली पेट कम से कम 15 दिन तक लें।
* चेहरे की झुर्रियाँ मिटाने और युवा बनाये रखने के लिए अंकुरित चने व मूंग को सुबह शाम अवश्य ही खाएँ।
* सर्दियों में तेल से मसाज कर करके गरम पानी से नहाएं और नहाने के बाद क्रीम से भी मसाज करें। इससे त्‍वचा टाइट रहेगी और रुखी भी नहीं होगी।
* विटामिन सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार जैसे की मछली आदि में होते है उसका ज्यादा से ज्यादा सेवन करें इससे त्वचा जवाँ बनी रहती है।
* चेहरे पर कॉफी पाउडर का लेप लगाने से कॉफी पाउडर में मौजूद कैफीन की वजह से चेहरे की झुर्रियां बहुत तेजी से खत्म होती है ।
* झुर्रियों के सफल उपचार के लिए पानी पीना बहुत जरूरी है, दिन में कम से 14 -15 गिलास पानी चाहिए ।
* सुंदर,गोरी और टाइट त्वचा के लिए सप्ताह में 1-2 बार चंदन फेस पैक लगाना चाहिए । चंदन पाउडर का पैक चेहरे पर पड़े गहरे दाग धब्बे , झाइयां और झुर्रियों को जल्दी दूर करता है।
* हर रात को कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें, इससे चेहरे के डार्क सर्किल और आंखें सूजी हुई नजर नहीं आएंगी। कभी भी तकिये में मुंह छिपा कर भी नहीं सोएं क्योंकि इससे भी चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाती हैं।
* हमारी त्वचा पर तेज धूप का बहुत कुप्रभाव पड़ता है। इसलिए धूप में निकलने से पहले त्वचा पर ऐसा सनस्क्रीन, जिसमें जिंक ऑक्साइड हो जरूर लगाएं।
* एलोवेरा एवं शहद एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर हैं। त्वचा में नमी का स्तर बढ़ाने के लिए इन्हे प्रतिदिन आजमाएं इनसे भी झुर्रियां कम होंगी। * उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर में कोलाजिन बनाना बंद हो जाता है, जिससे त्वचा में लचीलापन कम हो जाता है। इस बचने के लिए नमी वाला साबुन और क्रीम का रोज़ इस्तमाल करें। नित्य विटामिन सी युक्त क्रीम प्रयोग करें और ज्यादातर समय धूप से दूर रहें।
* अपनी त्वचा को झुर्रियों से बचाने के लिए हमें नियमित रूप से ताजे फलों जैसे आम, जामुन, संतरा, मौसम्मी, लीची, सेव, अंगूर, नाशपाती, पपीता, अनार और हरी सब्जियों पालक, बंदगोभी और दिन में कम से कम एक बार सलाद का सेवन करना चाहिए । इनमें ढेर सारे विटामिन्स एवं खनिज मसलन आयरन, विटामिन सी, विटामिन बी, फाइबर इत्यादि होते हैं । जो अत्यंत हीं लाभकारी होते हैं तथा हमारी त्वचा को जवान एवं खुबसूरत बनाये रखते हैं
* नियमित व्यायाम करना बहुत जरुरी है। व्यायाम करने से हमारी हर कोशिका को ओक्सिजन एवं रक्त प्राप्त होता है जिससे आपकी त्वचा जवान रहती है तथा झुर्रियां भी दूर रहती है ।
* पेट साफ रखने और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर कर भी आप चेहरे पर झुर्रियां पड़ने से रोक सकते हैं।
* तनाव से यथासंभव बचे । तनाव से हमारे शरीर में एक रसायन कोरटीसोल का स्राव होता है जो हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाता है जिससे झुर्रियां शीघ्र पड़ती है ।
* गुस्सा करने से बचे । गुस्सा करने अथवा तरह तरह से मुंह बनाने से भी चेहरे पर उम्र के पहले हीं झुर्रियां पड़ जाती हैं।
* सिगरेट और शराब दोनों की ही वजह से झुर्रियों बहुत तेजी से पड़ती है । स्मोकिंग से हमारे होठों का रंग काला पड़ जाता है और चेहरे की त्वचा का कोलाजिन भी नष्ट होता है, जिससे चेहरे पर तेजी से झुर्रियां पड़ने लगती है

Friday, 29 August 2014

एलर्जी: कारण, लक्षण एवं आयुर्वेद उपचार

एलर्जी: कारण, लक्षण एवं आयुर्वेद उपचार
एलर्जी या अति संवेदनशीलता आज की लाइफ में बहुत तेजी से बढ़ती हुई सेहत की बड़ी परेशानी है कभी कभी एलर्जी गंभीर परेशानी का भी सबब बन जाती है जब हमारा शरीर किसी पदार्थ के प्रति अति संवेदनशीलता दर्शाता है तो इसे  एलर्जी कहा जाता है और जिस पदार्थ के प्रति प्रतिकिर्या दर्शाई जाती है उसे एलर्जन कहा जाता है l

एलर्जी  के कारण –
एलर्जी किसी भी पदार्थ से ,मौसम के बदलाव से या आनुवंशिकता जन्य हो  सकती है एलर्जी के कारणों में धूल ,धुआं ,मिटटी पराग कण, पालतू या अन्य जानवरों के संपर्क में आने से ,सौंदर्य प्रशाधनों से ,कीड़े बर्रे आदि के काटने से,खाद्य पदार्थों से एवं कुछ अंग्रेजी दवाओ के उपयोग से एलर्जी हो सकती है सामान्तया एलर्जी नाक ,आँख ,श्वसन  प्रणाली ,त्वचा  व खान पान से सम्बंधित होती है किन्तु कभी कभी पूरे शरीर में एक साथ भी हो सकती है जो की गंभीर हो सकती है l
 स्थानानुसार  एलर्जी  के  लक्षण  -
  •  नाक    की  एलर्जी -नाक  में  खुजली होना ,छीकें आना ,नाक  बहना ,नाक  बंद होना  या  बार  बार जुकाम  होना आदि l
  • आँख की एलर्जी -आखों में लालिमा ,पानी आना ,जलन होना ,खुजली आदि l
  • श्वसन संस्थान की एलर्जी -इसमें खांसी ,साँस लेने में तकलीफ एवं अस्थमा जैसी गंभीर समस्या हो सकती  है l
  • त्वचा की एलर्जी -त्वचा की एलर्जी काफी कॉमन है और बारिश का मौसम त्वचा की एलर्जी के लिए बहुत ज्यादा    मुफीद है त्वचा की एलर्जी में त्वचा पर खुजली होना ,दाने निकलना ,एक्जिमा ,पित्ती  उछलना आदि होता है l
  • खान पान से एलर्जी -बहुत से लोगों को खाने पीने  की चीजों जैसे दूध ,अंडे ,मछली ,चॉकलेट  आदि से एलर्जी  होती  है l
  • सम्पूर्ण शरीर की एलर्जी -कभी कभी कुछ लोगों में एलर्जी से गंभीर स्तिथि उत्पन्न हो जाती है और सारे शरीर में  एक साथ गंभीर लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं ऐसी स्तिथि में तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाना चाहिए l
  • अंग्रेजी दवाओं से एलर्जी-कई अंग्रेजी दवाएं भी एलर्जी का सबब बन जाती हैं जैसे पेनिसिलिन का  इंजेक्शन जिसका रिएक्शन बहुत खतरनाक होता है और मौके पर ही मोत हो जाती है इसके अलावा  दर्द की गोलियां,सल्फा ड्रग्स एवं कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी सामान्य से गंभीर एलर्जी के लक्षण उत्पन्न  कर सकती हैं l
  • मधु मक्खी ततैया आदि का काटना –इनसे भी कुछ लोगों में सिर्फ त्वचा की सूजन और दर्द की  परेशानी होती है जबकि कुछ लोगों को  इमर्जेन्सी में जाना पड़ जाता है l
एलर्जी  से  बचाव - एलर्जी से बचाव ही एलर्जी का सर्वोत्तम इलाज है इसलिए एलर्जी से बचने के लिए इन उपायों का पालन करना चाहिए 1.य़दि आपको एलर्जी है तो सर्वप्रथम ये पता करें की आपको किन किन चीजों से एलर्जी है इसके लिए आप ध्यान  से अपने खान पान और रहन सहन को वाच करें l
  • घर के आस पास गंदगी ना होने दें  l
  • घर में अधिक से  अधिक  खुली और ताजा हवा आने का मार्ग  प्रशस्त करें  l
  • जिन खाद्य  पदार्थों  से एलर्जी है उन्हें न खाएं l
  • एकदम गरम से ठन्डे और ठन्डे से गरम वातावरण में ना जाएं l
  • बाइक चलाते समय मुंह और नाक पर रुमाल बांधे,आँखों पर धूप का अच्छी क़्वालिटी का चश्मा  लगायें l
  • गद्दे, रजाई,तकिये के कवर एवं चद्दर आदि समय समय पर गरम पानी से धोते रहे l
  • रजाई ,गद्दे ,कम्बल आदि को समय समय पर धूप दिखाते रहे l
  • पालतू  जानवरों से एलर्जी है तो उन्हें घर में ना रखें l
  • ज़िन पौधों के पराग कणों से एलर्जी है उनसे दूर रहे l
  • घर में मकड़ी वगैरह के जाले ना लगने दें समय समय पर साफ सफाई करते रहे l
  • धूल मिटटी से बचें ,यदि धूल मिटटी भरे वातावरण में काम करना ही पड़ जाये तो फेस मास्क पहन कर काम करेंl
  • नाक की एलर्जी -जिन लोगों को नाक की एलर्जी बार बार होती है उन्हें सुबह भूखे पेट 1 चम्मच गिलोय और 2 चम्मच आंवले के रस में 1चम्मच शहद मिला कर कुछ समय तक लगातार लेना चाहिए इससे नाक की एलर्जी में आराम आता है ,सर्दी में घर पर बनाया हुआ या किसी अच्छी कंपनी का च्यवनप्राश  खाना भी नासिका एवं साँस की   एलर्जी से बचने में सहायता करता है आयुर्वेद की दवा सितोपलादि पाउडर एवं गिलोय पाउडर को 1-1 ग्राम की मात्रा   में सुबह शाम भूखे पेट शहद के साथ कुछ समय तक लगातार लेना भी नाक एवं श्वसन संस्थान की एलर्जी में बहुत आराम देता है
  • जिन्हे  बार बार त्वचा की एलर्जी होती है उन्हें मार्च अप्रेल के महीने में जब नीम के पेड़ पर कच्ची  कोंपलें आ रही हों उस समय 5-7 कोंपलें 2-3 कालीमिर्च के साथ अच्छी तरह चबा चबा कर 15-20 रोज तक खाना  त्वचा के रोगों से बचाता है, हल्दी से बनी आयुर्वेद की दवा हरिद्रा खंड भी त्वचा के एलर्जी जन्य रोगों में बहुत गुणकारी  है इसे किसी आयुर्वेद चिकित्सक की राय से सेवन कर सकते हैं l
सभी एलर्जी जन्य रोगों में खान पान और रहन सहन का बहुत महत्व है इसलिए अपना खान पान और रहन सहन ठीक रखते हुए यदि ये उपाय अपनाएंगे  तो अवश्य एलर्जी से लड़ने में सक्षम होंगे और एलर्जी जन्य रोगों से बचे रहेंगे एलर्जी जन्य रोगों में अंग्रेजी दवाएं रोकथाम तो करती हैं लेकिन बीमारी को जड़ से ख़त्म नहीं करती है जबकि आयुर्वेद की दवाएं यदि नियम पूर्वक ली जाती है तो रोगों को जड़ से ख़त्म करने की ताकत रखती हैं l

Thursday, 28 August 2014

मुंह के छालों के लिए घरेलु नुस्खे

मुंह के छालों के लिए घरेलु नुस्खे 

मुंह में छाले होने का मुख्य कारण कब्ज तथा अजीर्ण है| इसके साथ ही मांस, मछली, अंडा, मिर्च, तेल, सोंठ, गरम मसालों से युक्त भोजन अधिक मात्रा में सेवन करने से मुंह में छाले उभर आते हैं| तेल तथा तेल में तले हुए पदार्थों और बहुत गरम चीजों को खाने से भी यह रोग हो जाता है| गरम पदार्थ मुख की कोमल श्लेष्मिक कला में प्रदाह उत्पन्न कर देते हैं जिससे गरमी का सीधा प्रभाव मुंह के भीतर दिखाई देने लगता है| पेट की गरमी बढ़ जाती है और पाचन-क्रिया ठीक प्रकार से नहीं हो पाती| दूसरे गरमी के कारण पेट में मल सड़ता रहता है| फिर वह गरमी वायु को ऊपर की ओर खिसकाती है जो मुंह में छाले पैदा कर देती है|


पहचानइस रोग में जीभ के किनारों, तालू तथा होंठो के भीतरी भाग में छोटी-छोटी फुंसियां पैदा हो जाती है| ये फुंसियां कभी-कभी छोटी दिखाई देती है तथा तभी बड़ी मालूम पड़ती हैं| इनमें जलन होती है| इनका रंग लाल होता है| इनमें सुई चुभने जैसी पीड़ा होती है| कभी-कभी खुजली भी होने लगती है| कई बार सारा मुख लाल पड़ने के बाद सूज जाता है| यदि रोग बढ़ जाए तो फुंसियों के पकने की नौबत आ जाती है| मुंह में सूजन आने से प्राय: कुछ भी खाना-पीना मुश्किल हो जाता है|

चिकित्सा
  • कत्थे को महीन पीसकर उसमें थोड़ा-सा शहद मिला लें| फिर इसे छालों पर लगाएं| मुंह झुकाकर लाल नीचे की ओर टपका दें|
  • फूला हुआ सुहागा तथा शहद - दोनों को मिलाकर छालों पर लगाएं|
  • त्रिफला चूर्ण रातो को सोते समय गरम पानी से लेना चाहिए| इससे पेट का कब्ज ढीला पड़ेगा और सुबह मल साफ आएगा| पेट ठीक होते ही छाले अपने-आप सूख जाएंगे|
  • #आंवले का चूर्ण सुबह-शाम 5-5 ग्राम की मात्रा में गरम पानी से लें|
  • रात को सोते समय एक या दो चम्मच #ईसबगोल की भूसी खाकर ऊपर से पानी पी लें|
  • #तुलसी तथा #चमेली के पत्ते चबाकर लाल नीचे टपकाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं|
  • दो चम्मच #शहतूत का शरबत ताजे पानी में डालकर गरारे करें|
  • टमाटर का रस पानी में मिलाकर उससे गरारे करें|
  • साबुत #धनिया को पीसकर चूर्ण बना लें| फिर इस चूर्ण को छालों पर बुरककर लार नीचे गिरा दें|
  • हरा धनिया, सूखा धनिया तथा पुदीना - तीनों 5-5 ग्राम लेकर चटनी बना लें| इस चटनी को जीभ पर लगाकर लाल बाहर गिराते रहें| यह चटनी दिनभर में चार-पांच बार लगाएं|
  • #अमरूद की चार-पांच मुलायम पत्तियों को एक गिलास पानी में उबालें| फिर इस पानी को छानकर कुल्ला करें| इससे मुंह की दुर्गंध भी दूर होती है|
  • भोजन के बाद केवल #सौंफ का पानी पीने से मुंह के छाले सूख जाते हैं| इसके लिए एक गिलास पानी में दो चम्मच सौंफ डालकर औटाएं| फिर पानी को छानकर ठंडा होने के लिए रख दें| यही सौंफ का पानी प्रयोग करें|
  • अंजीर के पेड़ से कच्चे #अंजीरों का दूध इकट्ठा करके छालों पर लगाएं|
  • जायफल को पानी में घिसकर उंगली से जीभ तथा तालू पर लेप करें| लार बाहर निकाल दें|
  • #अरहर की हरी पत्तियों को चबाकर थूक दें| लार पेट में जाने दें| छालों को दूर करने की यह बड़ी कारगर दवा है|
  • #मेहंदी तथा #फिटकिरी - दोनों को बराबर की मात्रा में पीसकर छालों पर लगाएं|
  • लाल #इलायची के छिलकों को सुखाकर पीस लें| फिर इस चूर्ण को पानी में भिगोकर या पानी में पेस्ट बनाकर छालों पर लगाएं|
  • #करेले के रस को पानी में डालकर कुल्ला करने से छाले दूर होते हैं|
  • #मसूर की दाल को आग में भून लें| इसमें समभाग बरेली वाला सफेद कत्था मिलाएं| दोनों को पीसकर मुख में लगाएं| लार नीचे टपका दें|
जौ को आग में जलाकर कोयला कर लें| अब इनको पीस डालें| इसमें दो चुटकी पिसा हुआ कत्था मिलाएं| दोनों का मिश्रित चूर्ण छालों पर लगाएं|
छालों में गाय या भैंस का घी उंगली से लगाएं|
मुलहठी, नीम की पत्तियां तथा मेहंदी की पत्तियां पानी में उबालकर पानी छान लें| फिर इस पानी से गरारे करें|
आम की छाल, पीपल के पेड़ की छाल तथा बबूल की छाल लेकर पानी में औटा लें| फिर इस पानी से बार-बार कुल्ला करें|
बेर के पत्तों को पानी में उबालकर उससे कुल्ला करना चाहिए|
मौलसिरी के पेड़ की छाल को पानी में उबालकर उससे कुल्ला करें|